मंगलवार, 24 मार्च 2026

Self composed motivational poem on devine love in Hindi

 

Self composed motivational poem in hindi



कल ख्वाब में जब हम मिले 
तब एक नयी उम्मीद जगी 
एक रात गयी सुबहा निकली 
कुछ बात तारों से कह भी दी ।




आकाश तले  जब जगदम्बा 
कोई ख्वाब बुने और ख्वाब चुनें 
भरकर अपनी ही प्राणवायु बस शिव की ही तलाश करे ।




एक प्रेमगीत बस सुनकर ही 
जब भैरव से शिव निकले 
तब दृष्टि खुले उस प्रभु की भी जो बस अपनी धुनी रमे ।



इक ध्वनि सुनकर जब शिव जागे,
तब राक्षसि प्रवृत्ती का अंत जगे 
कुछ प्रेम से हो जो पहले ना हुआ,
केवल प्रभु कोमल ह्रदय रहें ।



उस प्रेम चाह में जब प्रभु जी 
उस पल ही दूसरी सृष्टि बने 
तप बनकर अग्नि प्रज्वलित कर 
केवल अभिमानी व्यक्ति जले 




जो ना काम के थे प्रभु बिन 
केवल अवकाश प्राप्त अवगुण 
प्रभु चाह स्वयं लिखें जगदम्बा 
वह शक्ति सुसज्जित प्रेम बने ।











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