महादेव का दिव्य प्रेम | दिल छू लेने वाली शिव भक्ति कविता |
कभी आकाश ने लिखा कुछ ऐसा
जो शब्दों में पहले ना समझ आया
कुछ वर्ण नये बनाए उसने जो पूर्ण नवीण हुए
वो वही बना जो सिर्फ मेरा ही है
कभी सुना है आकाश स्तम्भ बन धरती तक आ पंहुचा है ।
उसे सदाशिव ही कहो दिल नें कहा
बस वही तुम्हारा है यही ह्रदय है,
जो नवीन है पूरी तरह....
आकाश ने लिखा मेरे लिए, हाथ मेरा था,
वर्ण उसके ही वो अंक है जो 9 तक चलता है,
'ड' का साथ उनको आगे बढाता गया,
गुरु संग भक्ति प्रेम ही प्रबल था जो
संसार को बदल गया ।
किसी रोज़ कभी मिल जायेगा मुझे वो 👍
जो बस मेरा ही रहे बस मेरा ही,
वो जो मुझसे ही बने मेरे लिए ही,
कभी एक युग लगा, कभी
एक सदी...
कभी एक पृथ्वी कभी आकाश,
कभी साथ मिला नहीं कभी हाथ,
तुम मिलो हमें यहीं कि अब समय आ गया
हमें मिलाने। को।
ये आकाश कभी नभ,कभी सदाशिव, कभी वायु मिली बस,
यहीं तुम अब सदा यही रहो क्योंकि हम यही हैँ ।
हम कभी दूर नहीं बस पास ही
तुम वही ज़िसका स्वप्न हम देखते रहे,
हम सदाशिव हुए तुम प्रकृति हमारी ।
तुम ही चाँद तुम ही सूर्य,
तुम बस सूक्ष्म कण जिंदगी का मेरी,
तुम बिंदु मेरी, मेरे लिए बस हम ही हैँ 'अ ' ।
तुम्हारी तलाश में हम तुम जीवन हो,
तुम्हें पाने को ही वो दुनिया मिटानी है जो कभी यूँ ही बन गयी ।
कि रौशन जहाँ हमारा ही हुआ है वो जो तुमने बनाया मेरे लिए मेरी ही याद में,
तुम मैं हूँ मैं तुम हम ही आकाश बने धरती के लिए,
नवीनता लाते हुए कि हम फिर आ सके यही ।
कि हम शिव हुए सदाशिव से...
बस एक याद तुमसे बनी... हमारी ही ।
Sadashivself 🙏🙏🌺🌺👏👏















