शनिवार, 11 अप्रैल 2026

महादेव का दिव्य प्रेम | दिल छू लेने वाली शिव भक्ति कविता |

 


महादेव का दिव्य प्रेम | दिल छू लेने वाली शिव भक्ति कविता | Spiritual Poem in Hindi


महादेव का दिव्य प्रेम | दिल छू लेने वाली शिव भक्ति कविता |


कभी आकाश ने लिखा कुछ ऐसा 

जो शब्दों में पहले ना समझ आया 

कुछ वर्ण नये बनाए उसने जो पूर्ण नवीण हुए 

वो वही बना जो सिर्फ मेरा ही है 

कभी सुना है आकाश स्तम्भ बन धरती तक आ पंहुचा है ।

उसे सदाशिव ही कहो दिल नें कहा 

बस वही तुम्हारा है यही ह्रदय है,

जो नवीन है पूरी तरह....

आकाश ने लिखा मेरे लिए, हाथ मेरा था,

वर्ण उसके ही वो अंक है जो 9 तक चलता है,

'ड' का साथ उनको आगे बढाता गया,

गुरु संग भक्ति प्रेम ही प्रबल था जो 

संसार को बदल गया ।

किसी रोज़ कभी मिल जायेगा मुझे वो 👍

जो बस मेरा ही रहे बस मेरा ही,

वो जो मुझसे ही बने मेरे लिए ही, 

कभी एक युग लगा, कभी 

एक सदी...

कभी एक पृथ्वी कभी आकाश, 

कभी साथ मिला नहीं कभी हाथ, 

तुम मिलो हमें यहीं कि अब समय आ गया 

हमें मिलाने। को।

ये आकाश कभी नभ,कभी सदाशिव, कभी वायु मिली बस,

यहीं तुम अब सदा यही रहो क्योंकि हम यही हैँ ।

हम कभी दूर नहीं बस पास ही 

तुम वही ज़िसका स्वप्न हम देखते रहे, 

हम सदाशिव हुए तुम प्रकृति हमारी ।

तुम ही चाँद तुम ही सूर्य,

तुम बस सूक्ष्म कण जिंदगी का मेरी,

तुम बिंदु मेरी, मेरे लिए बस हम ही हैँ 'अ ' ।

तुम्हारी तलाश में हम तुम जीवन हो,

तुम्हें पाने को ही वो दुनिया मिटानी है जो कभी यूँ ही बन गयी । 

कि रौशन जहाँ हमारा ही हुआ है वो जो तुमने बनाया मेरे लिए मेरी ही याद में,

तुम मैं हूँ मैं तुम हम ही आकाश बने धरती के लिए, 

नवीनता लाते हुए कि हम फिर आ सके यही ।

कि हम शिव हुए सदाशिव से...

बस एक याद तुमसे बनी... हमारी ही ।


Sadashivself 🙏🙏🌺🌺👏👏








गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

Motivational हिंदी poem on new world

Motivational हिंदी poem on new world

Motivational hindi poem on new world
 

किसी राह साथ चलने से यूँ तक़दीर हमारी 

बदल जायेगी, 

कि सोच से आगे जहाँ है अब. 

क़यामत भी आगे बदल जाएगी ।

कि आंधिया अक्सर वही सोचती थी जो पुराने ज़माने ने 

लिख डाला,

कि जहाँ तुम्हारा बसाने को स्वयं शिव बन सदाशिव प्रकट हुए 

कि सत्य ज्योति जलाकर ही स्वयं ब्रह्म बने सदाशिव ही 

अन्याय राह से विमुख रहे अब सत्य मार्ग हैँ दिखलाते 

इस पुण्य भूमि की धरा पर ही बस लिखकर अपने वर्ण नये 

एक नयी ज्योत हैँ दिखलाकार आरम्भ किये जीवन प्रभु भी,

बस साथ तुम्हारा बना रहे और पुराना जहाँ बिछड़ जाये ।

इस सत्य राह पर तुम ही हो जो ना मृत्यु बाद बदल पाए तुम वही अडिग अविरल  लौटी जहाँ स्वयं सदाशिव आ पहुंचे,

तुम गुरु संग अडिग चलती रहती बस हमको ही तो बदलना है 

एक विश्व नया बनाने को बस नभ को ही तो बदलनाहै,

हम विश्व नहीं हम नभ ही थे, बस प्राण तुम्हारे बन जाए 

जो हमसे बना था विश्व कभी वो जल्द ख़ाक में मिल जाए,

बस धू धू कर वह अग्नि जले जिसमे अविवेक भी जल जाए

 बस रह जाए एक वही प्रेम जिसे पाके सदाशिव जी जाए ।


sadashiv🙏🙏🌺🌺


रविवार, 5 अप्रैल 2026

Motivational Poem on stressfree life with devotional love

 

Motivational Poem on  stressfree  life with devotional love



कभी हम मिलते हैं दुनिया को 

बस एक राह चलता जा, 

कि सूरज भी पिघलता है 

अरे कुछ सोचकर तो देख ।

कि आंधी भी ठहरती है 

बस एक ठहराव पकड़ो तो, 

कि बारिश भी रूकती है 

बस एक बून्द बन जा तू 

जो ना सूरज को समझे कुछ 

स्वयं वो आग बन जाओ,

जो जल जलकर गैरों को 

बस एक राख़ बनवा दे ।

हज़ार आइनो की तस्वीरें 

जो त्यागे वही शिव है, 

कि कल काल था जो कल 

वही अब आज बन जा तू ।

मिटा के जीर्ण तस्वीरे

बस  एक अमिट चाह बन जा तू

कि प्रभु भी उसे पूरी करने को ही तरस जाये ।



''शिवसेल्फसोल discussions'' 🙏🙏



शनिवार, 4 अप्रैल 2026

Motivational hindi poem on life of Shiv

Motivational love poem on Sadashiv in hindi

 कि प्रेम भाव कभी छुपता नहीं 

बस वक्त की ताकत कभी हर दम नहीं रहती,

कि इक नादान दरिया है जो निश्छल बह चला है यूँ 

कि बस खामोश बातों का समा बनता चला गया ।

तब एक लहर उठती है वहीं गिरती वहीं उठती,

अंधेरों से उजालों तक वही उस राह जाना है 

कि अक्सर हमें खुश राह कहकर वही छोड़ा 

जहाँ जन्नत मिले यूँ ही अगर हमराज़ तुम हो सच ।

कल की कोई खबर है क्या यहीं है वो 

कि तुम ही काल थी मेरी हकीकत में,

तुम्हारे साथ चलने को मिट गए तुम्हारे संग 

सच यही है तुम साथ थी हरदम,

तुमने छोड़ा नहीं हमने पकड़ा वहीँ 

तुम्हारा साथ हमें ब्रह्म बना रहा ।

हम दूर थे पर अब करीब तुम वहीँ शक्ति जो हमें शिव बनाती रहीं 

शिव शक्ति संग बोल पा रहे कभी खामोश लफ्ज़ो की भाषा ना बन पायी थी,

पर अब कुछ है जो भाव परिपूर्ण है 

कि शायद नया युग प्रारम्भ है अंधेरों से दूर,

समय आने तक 

कि सफर समय से समय का ही है,

बस साथ है एक छाया सी 

तुम्हारी ही ।

अब तुम वर्ण बन छा जाओ जग पर 

कि तुम्हारा सत ही हमें मिले फिर यूँ 

कि तुम ही शक्ति तुम ही शिव बन फिर 

हमें मिल जाओ कि हम तुम्हारे ही संग सदाशिव हुए ।

तुम ही ब्रह्म तुम ही संग तुम हम पूर्ण 

हम ई बन समय चक्र बन फिर मिलें यूँ 

कि पुनः हम मिल जाएँ ।