बदल जायेगी,
कि सोच से आगे जहाँ है अब.
क़यामत भी आगे बदल जाएगी ।
कि आंधिया अक्सर वही सोचती थी जो पुराने ज़माने ने
लिख डाला,
कि जहाँ तुम्हारा बसाने को स्वयं शिव बन सदाशिव प्रकट हुए
कि सत्य ज्योति जलाकर ही स्वयं ब्रह्म बने सदाशिव ही
अन्याय राह से विमुख रहे अब सत्य मार्ग हैँ दिखलाते
इस पुण्य भूमि की धरा पर ही बस लिखकर अपने वर्ण नये
एक नयी ज्योत हैँ दिखलाकार आरम्भ किये जीवन प्रभु भी,
बस साथ तुम्हारा बना रहे और पुराना जहाँ बिछड़ जाये ।
इस सत्य राह पर तुम ही हो जो ना मृत्यु बाद बदल पाए तुम वही अडिग अविरल लौटी जहाँ स्वयं सदाशिव आ पहुंचे,
तुम गुरु संग अडिग चलती रहती बस हमको ही तो बदलना है
एक विश्व नया बनाने को बस नभ को ही तो बदलनाहै,
हम विश्व नहीं हम नभ ही थे, बस प्राण तुम्हारे बन जाए
जो हमसे बना था विश्व कभी वो जल्द ख़ाक में मिल जाए,
बस धू धू कर वह अग्नि जले जिसमे अविवेक भी जल जाए
बस रह जाए एक वही प्रेम जिसे पाके सदाशिव जी जाए ।
sadashiv🙏🙏🌺🌺



