एक छाव मिली जीवन को यूँ
कि पतझड़ हमसे रूठ गए,
एक महल मिला अब सपनो का
कि व्यर्थ अतीत भी सिमट गए ।
बस याद तुम्हारी आती है
तुम अश्रु बने मझधार हुए,
इक याद तुम्हारी हे प्रियतम
इस नैय्या की पतवार बनी ।
बस अश्रु बहे इन नैनो में
याद ह्रदय में अवस्थित है,
यह विश्व नहीं बस याद तुम्हीं
चाहे हो नभ के हीर बने ।
कि प्रेम अग्नि में तपकर ही
सब विश्व धरा के कुंद बने,
एक स्वर्ण प्रेम की अनुभूति
बस कल हृदय ही भाव सुने,
अंदर अनुभूति प्रेम की बन,
केवल वह प्रेम परम ही सुने ।
यह अनुभूति विचित्र ही है
बस भीतर भीतर अग्नि जले
यह अग्नि जलाकर सब मैल बाह्य
इक सुंदर सा प्रभुवन चुने ।
ज़िद भी मेरी मेरा ही रंग
सब मेरी तरह ही राह चुनें
प्रभु मिल जायेंगे उस पथ पर ही
जो राह उसी छण ह्रदय चुने ।
अब एक ह्रदय ही कहता है
भाव प्रभु ही सुनता है,
इस भाव भाव को कह करके
जाने कितने अब विश्व बने ।
तुम मिल जाना उस पथ पर ही
जिस पर थे कभी हमें प्रभु मिले
बस प्रेम अग्नि की किरणों से
रौशन हो नैन बन अश्रु बहें ।
जग भी झूठा और काल भी
बस 'पल पल 'ही अब स्वास बने
सब छूट ह्रदय ही गाये गीत झूम
मन सुगन्धित पवन बने ।
बस प्रभु तन में
बस प्रभु मन में,
उस कोमल ह्रदय के गीत सुने ।
