एक सफर मुसाफिर का उस रास्ते चल पड़ा है
कि सफर का आइना नैन ही हो गए,
हम राह तकते तकतें मुसाफिर ही बन गए,
और राह हमारी कारवां बन गयी ।
हम एकसार बन जब उलझ कर मिल गए,
फिर ना बिछड़ने का सिलसिला बन गए...
एक उम्मीद है अभी तुमसे मिलने की...
बस साथ दे दे तो हमनवा बन गए ।
कि सच्चाई नहीं छुपती अपने आपसे कभी
अगर आइना पास हो तो भी...
और नैन साथ दे दें तो भी ।
बस मन एक समंदर सा गहरा कर ले ए दिल
कि एक उछाल ही काफी है आवाज़ सुनाने के लिये ।
एक राह काफ़ी है तेरा साथ मिलने तक
बस वो साथ, वो चेहरा, हमें फिर दिखाई दे...
कल कोई ख्वाब ना आये बगैर तेरे हमें
कि महफिल का अंधेरा हमें फिर ना यूँ रुलाये कभी।
