Motivational poem in hindi
जिसने इस दिल के सिवा कुछ कभी सुना नहीं,
एक खामोश दरिया बस बहता ही रहे
क्यों उसमें एक पत्थर फेका नहीं ।
एक पत्थर तोड़ती नीर की ख़ामोशी
नीर वही है पर कभी किसी के लिए झुका नहीं ।
एक लहर बस बन जाती पानी की जगह उस पत्थर को ही
ढूंढती जो चुपचाप नीचे गया उसे जगाते हुए,
पानी तो जगा एक शोर हुआ पत्थर ना मिला उस पानी को,
बस भँवर बना उसे पाने को जिस में आहूति उसी की थी
हम वायु बने बस सुनने को कि ध्वनि हमसे कुछ कहती रही
हम सुन सुन कर यूँ खुश हुए कि कान वो ध्वनि सुनने तरसे,
बस ध्वनि ही रहे हम सुनते रहें दुनिया यूँ ही अब चल निकले
उस वायु सुगन्धि के खातिर हम नभ से उठकर अब अग्नि बने।
हमें प्रेम उसी ध्वनि से है जो कानो को अक्सर भाती है,.
एक छण में सही पर चुपके से जीवन का राज़ सुनाती है,
हम भूल जिया कि व्याकुलता बस दर दर यूँ भटकते हैं,
जैसे सब कुछ संसार ही है भीतर ही हमारे शोर बसा ?
बस उल्टा चल,भीतर ही ढूंढ़ सब कुछ तो शुरू यही से है,
तू शून्य भी है, तू पूर्ण भी है बस देख दूसरी नज़रो से ।
प्रभु एक सफर हैं उस इंतज़ार का
जिसे बस प्रभु से मिलने को किया जाए
मिल जाएं तो फिर ना छोड़ा जाए
जन्मों जन्मों तक ।
प्रभु से मिलने का वादा किया है
हर जन्म पर हर जन्म तक...
क्योंकि सब चले जाते हैँ
Bas प्रभु ही तो रह जाते हैँ
इंतज़ार में....
इसलिए हम हमेशा साथ चलते हैँ
प्रभु संग ।

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