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रविवार, 25 जनवरी 2026

Shiv Shakti -- हिंदी कविता hindi poem



Shiv Shakti hindi poem

 कि शुरुआत जहाँ से हुई

वहीँ रहो ऐ दिल

कि हम मिलेंगे तुम्हें

जब तुम कहोगी 

कि अफ़सोस कुछ नहीं बस इतना ही है

कि देर हुई हमें फिर भी... सही

कि शाम को उस सुबह का इंतज़ार है

ज़िसका हमें इंतज़ार था कभी

कल वक्त था आज सुबह है,

आज जीवन है रौशन तेरे आने से

अब हमें किसी  और की चाह नहीं 

बस यही लगा

कि आँधियो ने कभी ना दस्तक दी थी कभी ।

हज़ारो शून्य जैसे आ गए आसमान से

बस हम बिना सांस के बंधे हैँ कहीं

तमन्ना ज़िक्र चलने तक कुछ यूँ मिली हमसे

कि एक सांस सदियों तक ना चली हो कभी

कभी तेरा ज़िक्र हो और सांस यूँ चले जैसे कि तेरी जान दरिया थी 

और हम डूबते ही रहे...

हमें वापस वहीँ पाना कोई आसान बात है क्या

कि हम बिना प्रेम धरती पर नहीं आते

हमें सूरज भी ढूंढे हमें दरिया भी ढूंढे

हमारा निशां कभी कभी हमें भी नहीं मिलता...

तुम एक स्वप्न बनकर हमें यूँ मिली

 कि वो दुनिया ख़त्म होनी शुरू हो गयी 

अब साथ चल ऐ हमसफर क्योंकि एक दुनिया नई बनानी तो पड़ेगी

जब साथ है तो डर कैसा 

कि हम ही डर हम ही शक्ति हैँ,

अब साथ हम यूँ  हुए कि शक्ति ही शिव है और

शिव ही शक्ति ।