मंगलवार, 31 मार्च 2026

Motivational poem on jagdamba in hindi

 एक खामोश नदिया सी वही जो साथ बहती है 

के झुरमुट से ख़्वाबों के वही जो साथ चलती है 

वही खामोश लड़की है जो आगे चल नहीं सकती 

कि एक नाराज़ दरिया सी जो श्रष्टि भी समा लेती 

Motivational poem on Durga in hindi



वही खामोश लड़की है जो दम्बा भी है और काली भी 

बस एक सुनसान बस्ती की जो ना बनती मुसफ़िर भी 

जो उस इतिहास को बदले जो ना गवारा था हमें 

बनीबनायीं किताब का क्या क्यों पढ़ना उसे यूँ ही 

कि कुछ बदलो इस सृष्टि में अँधेरे हैँ इधर छाये 

कि इतिहास फिर से कभी ना इसे दोहराये 

कि रक्त रंजित खड़ग है बस साथ शिव चलते रहें 

देख लेंगे उन्हें भी जिन्हें गर्व इतिहास का है 

कि मातृ भूमि बस मात की है स्वयं शिव सेवक बने 

कि फिर ना कभी मात को कोई जगत में भूल सके 

जग मात से ही है कि झोली में शिव आ गिरे 

सब मातृ भूमि पर ही जन्म लेते हैँ जगदंब से पौरुष उधार लिए 

उस मात का ही है सब जग भी जीवन भी 

वही प्राण है जीवन का वही सृष्टि वही शक्ति 

कि प्राण जिस शरीर का है वो गर्व ना करे स्वयं पर यूँ ही 

बस प्राण शिव के भी उसी मात के दिए हैँ स्मरण रहे

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