बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

किस जगह के लोग हैँ हम ? हिंदी कविता

 

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किस जगह के लोग हैँ हम,

बस याद एक ही बात आती है,

सच्चाइओं से दूर जग,

 तेरी तस्वीर ही साफ नज़र आती है ।



कि हम उस गली ना गुज़र सके जिस गली

हमें ना सांस आ सकी थी ।

हम बस इंतज़ार में ही बैठे रहे,

कि मुसाफिर की मंज़िल अभी दूर थी ।



सफर ही सफर में जब नैन खुले,

तो देखा की सुबह हुई,

नहीं तो रात भर की करवट

कब ख़त्म होंगी पता ही ना था ।



कि याद तुम आती रही,

बस शक्ति ही बस शक्ति ही,

जीवन मिला तुम्ही से है,

अब और कुछ अपना नहीं ।



तुम संग जीवन मिल चुका जो

वो ही कीमती है 

कि जिस सांस ने छुआ नहीं...

वो अपना कभी था नहीं ।


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