मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

Ek safar musafir ka us raste chal pada hai

 

Hindi poems poems in hindi





एक सफर मुसाफिर का उस रास्ते चल पड़ा है

 कि सफर का आइना नैन ही हो गए,

हम राह तकते तकतें मुसाफिर ही बन गए,

और राह हमारी कारवां बन गयी ।


हम  एकसार बन जब उलझ कर मिल गए,

फिर ना बिछड़ने का सिलसिला बन गए...

एक उम्मीद है अभी तुमसे मिलने की...

बस साथ दे दे तो हमनवा बन गए ।


कि सच्चाई नहीं छुपती अपने आपसे,

अगर आइना पास हो तो भी

और नैन साथ  दे दे तो भी ।

बस मन एक समंदर सा गहरा कर ले

कि एक उछाल ही काफी है आवाज़ सुनाने के लिये ।






 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें