शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

नव विश्व बना धरा पर.... हिंदी कविता | hindi poem

 कभी मंज़िल की तलाश थी हमें,

कभी सैलाब की कमी रही, 

कभी उतराना पसंद ना था,

कभी जज़्बात की कमी रही ।

हिंदी कविता hindi poem



एक खामोश सा सफर साथ चलता रहा,

बस एक आह सांस भरती रही, 

कि तन्हा समंदरों से हमने ना बात की कभी,

बस एक आस यूँ ही दिल में दिया जलाती रही,

कि सौंध जाये बस तन मन संग 

कि आंसुओं का समा दूर हो कभी ।



हिंदी कविता hindi poem


बस एक प्रेम अग्नि सत की जले 

अंधकार सब मिट जाए,

अब एक विश्व यूँ जल जल कर 

बस प्रकाश ही भर जाये ।

यूँ सत्य श्याम सा रौशन है 

कि अंधेरा अब होगा नहीं, 

बस याद प्रेम की बनकर के 

नव विश्व बना धरा पर यहीं ।

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