हिंदी कविता-- Hindi poem
''हिंदी का सफर अनूठा है
हिंदी ही प्रारम्भ और विस्तार है
हिंदी हमारी मातृभाषा और हमारा संसार है
हिंदी ही हमारा अवसर और परिवार है''
कल फिर मिलें हम वहीं जहाँ से भाषा का उदय हो दुबारा सही
जहाँ फिरसे वर्ण बनें वही जिसे पाकर हो प्रेम तुमसे फिर वही
कोई मझधार बने ना उस राह फिरसे
बस हम वहीं और तुम वहीं...
हमारा चाहना बस इन वर्णो में ही है घुला
एक चाँद यूँ दिखा हमें की फिर ना छुप सका,
जब बात हुई उनसे तब मन एक उम्मीद जगी
कि सफर यूँ ही चलता रहे तुमसे मिलने तक
अब साथ मिला है तो यूँ ही चलना ।
कभी ना दूर हो बस साथ ही हो तेरा हरदम
कल फिर जब मिलें हम तब तुम रहो वही
जो हमारी राह में बस चाह बन जाये
तमन्ना फिर वही हो साथ चलने की
कि सांस ही सांस बन कर बहे
हर पल यूँ ही ।
हमेशा साथ रह 'अ' कि तुम सिर्फ मेरी थी
हमें खामोश समझना तो ज़माने की फितरत थी
हम यहीं इस धरती पर...बस विश्व नया है
कि आग का दरिया था और डूबकर आना था...
तुम्हीं शक्ति तुम्ही संग हो मेरे,
तुम्हारा साथ पाने को
क्यों ना आसमान तरसे...
हम ही शिव हैँ हम ही अम्बर
हम ही नव हैँ हम ही शक्ति,
चलो एक विश्व प्यारा
बना दें सिर्फ ' र ' तुम्हारे लिये...
संग हमें लिये....
( एक काव्य उद्धरण स्वयं द्वारा लिखित भक्ति काव्य से, ऑटोमैटिक राइटिंग का एक अंश)
जय शिव शम्भू 🙏🙏🙏



















